केरल की नर्स निमिषा प्रिया की 16 जुलाई को तय फांसी टल गई। भारत सरकार की कूटनीतिक कोशिशों और ब्लड मनी के प्रयासों से नई उम्मीद जगी। Sachtak.in पर पढ़ें पूरी खबर।
निमिषा प्रिया की फांसी पर राहत, नई उम्मीद जगी
केरल की नर्स निमिषा प्रिया की जिंदगी के लिए एक नई किरण जगी है। 16 जुलाई 225 को तय उनकी फांसी को आखिरी वक्त में टाल दिया गया है। इस फैसले के पीछे भारत सरकार की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा कारण माना जा रहा है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद यह खबर सामने आई कि सरकार ने पीड़ित परिवार और निमिषा के परिवार के बीच समझौते के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, जिसके तहत ब्लड मनी (शरिया कानून के तहत माफी के लिए रकम) का विकल्प खुला रखा गया है।
सरकार की कोशिशें और सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल आर वेंकट रमण ने बताया कि यमन एक कूटनीतिक रूप से मान्यता प्राप्त देश नहीं है, जिससे भारत की पहुंच सीमित है। उन्होंने कहा, "हमने जितना हो सकता था, उतना प्रयास किया है। पर्दे के पीछे निजी तौर पर कोशिशें जारी हैं, लेकिन इसे सार्वजनिक करना स्थिति को जटिल बना सकता है।" कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई 225 के लिए तय की है, ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके। सरकार का कहना है कि ब्लड मनी एक निजी समझौता है, जिसमें सरकारी हस्तक्षेप की सीमा है।
यमन में हूती प्रशासन का फैसला
निमिषा प्रिया को यमन के हूती प्रशासन द्वारा 217 में तलाल अब्दुल महदी की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। इस सजा को 22 में स्थानीय अदालत और 223 में यमन की सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी ने भी इस फैसले को मंजूरी दी थी। हालांकि, हालिया घटनाक्रम में फांसी को टालने का फैसला आया, जिसे अनौपचारिक संदेश के जरिए भारत को सूचित किया गया। सरकार ने इस पर संदेह जताया है, लेकिन इसे सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
ब्लड मनी: एकमात्र उम्मीद
शरिया कानून के तहत ब्लड मनी (दिया) पीड़ित परिवार को मुआवजा देकर माफी दिलाने का विकल्प है। निमिषा की मां प्रीमा कुमारी और समाजसेवी सैमुअल जेरोम भास्करन पिछले एक साल से यमन में इस समझौते के लिए प्रयासरत हैं। सैमुअल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्रालय को धन्यवाद दिया है। इसके अलावा, केरल के सुन्नी नेता कथापुरम एपी अबू बकर मुसलियार ने सूफी विद्वान शेख हबीब उमर से पीड़ित परिवार से बातचीत की अपील की, जिससे बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई है।
निमिषा का संघर्ष और घटनाक्रम
निमिषा प्रिया 28 में नौकरी के लिए यमन गई थीं। 211 में उन्होंने टॉमी थॉमस से शादी की और यमन में क्लीनिक खोलने की योजना बनाई। स्थानीय साझेदार के रूप में तलाल अब्दुल महदी से संपर्क हुआ, लेकिन बाद में महदी ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। निमिषा का आरोप है कि महदी ने उनके दस्तावेज जब्त कर लिए और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। 217 में निमिषा और उनकी साथी नर्स ह्नान ने महदी को बेहोश करने की कोशिश की, लेकिन ओवरडोज से उसकी मौत हो गई। शव को छिपाने की कोशिश नाकाम रही और दोनों गिरफ्तार हो गईं।
क्या चमत्कार संभव?
फांसी टलने से निमिषा की जान बचाने की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। पीड़ित परिवार ने अभी तक ब्लड मनी स्वीकार करने का सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है। अगर परिवार माफी के लिए सहमत होता है, तो यह एक चमत्कार होगा और निमिषा के भारत वापस आने का रास्ता खुल सकता है। सरकार और समाजसेवियों की कोशिशें जारी हैं, लेकिन यमन की जटिल कूटनीतिक स्थिति इसे मुश्किल बनाती है।
Sachtak.in की अपील
Sachtak.in जनता की आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि निमिषा प्रिया के मामले में कूटनीतिक प्रयासों को तेज किया जाए और पीड़ित परिवार से बातचीत में तेजी लाई जाए। साथ ही, स्थानीय संगठनों और समाजसेवियों का सहयोग बढ़ाया जाए ताकि ब्लड मनी समझौता संभव हो सके।
निष्कर्ष
निमिषा प्रिया की फांसी टलना एक राहत भरा कदम है, जो भारत सरकार की कूटनीतिक सफलता और समाजसेवियों के प्रयासों का परिणाम है। हालांकि, ब्लड मनी पर पीड़ित परिवार की सहमति ही अंतिम समाधान है। क्या यह चमत्कार होगा, इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा। Sachtak.in पर बने रहें और इस मुद्दे पर ताजा अपडेट्स पाएं।
लेखक: आशीष त्रिपाठी